मधुमक्खी पालन से कमाए लाखो रुपये || Earn handsome amount in Beekeeping

भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ कृषि कार्य प्रमुखता से किया जाता है। वर्तमान में कृषि लघु व्यवसाय से माध्यम श्रेणी के व्यवसाय की ओर उन्नमुख होता जा रहा है। भारत में अलग अलग स्थानों में कृषि कार्य पूरे वर्ष भर नहीं होता जिससे किसानों की आय केवल कुछ प्रमुख कृषि जोतो तक ही निर्भर रहती है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में कृषि कार्य के अलावा रोजगार के और भी साधन है जिन्हे कृषि के साथ भी किया जा सकता है । इनमे मधुमक्खी पालन एक ऐसा ही प्रमुख उद्योग है जिसमे कम लागत में लाभ का अनुपात ज्यादा होता है। मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) न केवल किसानो बल्कि समाज के अन्य तबको के लिए भी फायदेमंद है। इसके अलावा मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) से कृषि की उत्पादन क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता  है। आज के इस लेख में हम आपको मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) से जुडी सम्पूर्ण जानकारी देंगे जिससे आप इस उद्योग को शुरू कर बहुत अच्छा लाभ अर्जित कर सके।

Madhumakkhi Paalan (Beekeeping)

मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) का इतिहास

मधुमक्खी का वैज्ञानिक तरीके पालन करने के साक्ष्य अठारहवीं सदी के अंत से माना जाता है। स्विटजरलैंड में वर्ष 1789 में लकड़ी की पेटी, जिसे मौनगृह कहा जाता है, में वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी को पालने का प्रयास किया गया। इसके बाद विकसित रूप से आगे भी प्रयास चलते रहे।

मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) के लिए प्रक्षिक्षण

वैसे तो मधुमक्खी पालन के लिए किसी विशेष कोर्स को करने के जरुरत नहीं होती लेकिन इस उद्योग को शुरू करने के लिए थोड़ी बहुत जानकारी आवश्यक होती है। आप मधुमक्खी पालन से सम्बंधित कोर्स एक हफ्ते से नौ महीने तक कर सकते है। इस कोर्स के लिए अल्प शिक्षित व्यक्ति भी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना व्यवसाय शुरू कर सकता है।  इसका शुल्क नाम मात्रा का का है जो प्रति प्रशिक्षु 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक है। आप निम्न संस्थानों में से किसी भी संस्था में प्रवेश लेकर अपने रोजगार के साधन को बढ़ा सकते है।

  1. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली
  2. राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत नई दिल्ली
  3. निदेशक, उद्यान विभाग, कृषि पंत भवन, जयपुर, राजस्थान
  4. राज्यों में खादी ग्रामोद्योग संस्था
  5. बागवानी विभाग, उत्तर प्रदेश
  6. आर्य ग्रामोद्योग संसथान, कंडेरा गावं, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश
  7. राष्ट्रीय बागबानी बोर्ड, लालकोठी, जयपुर, राजस्थान
  8. मधुमक्खी पालन एंड शोध संस्थान कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
  9. मधुमक्खी प्रशिक्षण केंद्र, हल्द्वानी, नैनीताल
  10. मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण केंद्र, जनमहादेव रोड, खादी ग्रामोद्योग, देहरादून
  11. केन्द्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान

मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) के लिए सरकारी मदद

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में मधुमक्खी पालन के आधारिक संरचना को मजबूत करने के लिए आर्थिक पैकेज पेश किया है जिसमे देश के लगभग दो लाख मधुमक्खी पालको को आर्थिक दृष्टि से सम्बल बनाने के लिए 500 करोड़ देने की सरकार की योजना है।

इस योजना के मुख्य आधार निम्न प्रकार से है:-

  1. योजना के अंतर्गत परागण (Pollination) के माध्यम से मधुमक्खियों की नस्ल व गुणवत्ता सुधार पर प्रमुख जोर दिया जाएगा।
  2. सरकार के द्वारा मधुमक्खी पालन के लिए विकास केंद्र, शहद का एकत्रीकरण, विपणन, भण्डारण के लिए कार्य किये जायेगे।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन के माध्यम से रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने के लिए प्रयास किये जायेगे जिसमे न केवल मधुमक्खी पालन बल्कि मोम (wax) से भी रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जायेगा।
  4. इस उद्योग में महिलाओं की भागीदारी को भी सुनिश्चित किया जायेगा।

मधुमक्खी पालन उद्योग लघु उद्योग की श्रेणी में आता है जिसकी लिए सरकार के द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंको से ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। प्रारम्भ में इसके लिए 2 लाख से 5 लाख रुपये तक का ऋण बैंको के माध्यम से उपलब्ध है।

IDBI बैंक लोन के लिए क्लिक करे

ऋण के के लिए निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी
  1. आधार कार्ड
  2. स्थाई निवास प्रमाण पत्र
  3. विकलांगता की स्थिति पर विकलांगता प्रमाण पत्र
  4. पासपोर्ट साइज फोटो
  5. बैंक अकाउंट
  6. मोबाइल नंबर

मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) के लिए भौगालिक स्थिति

वैसे तो मधुमक्खी पालन के लिए कोई खास भौगालिक क्षेत्र की आवश्यकता नहीं होती है। ये उद्योग अपने घर या खेत की जमीन से किया जा सकता है। जहाँ फूलो के खेती की जाती है उस स्थान पर ये उद्योग लगाना काफी फायदेमंद होता है। इसके अलावा मधुमक्खी पालन के आस-पास के क्षेत्र में सरसो, ज्वार, बाजरा, मक्का, अरहर, तिल, सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, नींबू, किन्नू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, और गुलमोहर आदि फलवाले पेड़ पौधे हो तो और भी अच्छा होगा। ध्यान रखने योग्य बात ये भी है कि मधुमक्खी पालन मोबाइल के टावरों, रेलवे लाइन, भीड़ भाड़ वाली जगह से दूर किया जाना चाहिए। मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन के कारण 70 से 90 फीसदी तक मधुमक्खियां विलुप्त हो गई हैं। मोबाइल टावर से निकलने वाले इलेक्ट्रो मैग्नेटिक विकिरणों के कारण मधुमक्खियों में कॉलोनी कोलेप्स डिसॉर्डर नामक अवसाद पैदा कर रहा है। इससे उन्हें उड़ने में परेशानी होती है। उनका एक साथ चलने का क्रम टूट जाता है।  वे रास्ता भटकते हुए धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं।

Madhumakkhi Paalan (Beekeeping)

मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) के लिए आवश्यक सामग्री

मधुमक्खी पालन के लिए लकड़ी का बॉक्स, बॉक्स फ्रेम, मुंह पर ढकने के लिए जालीदार कवर, दस्तानें, चाकू, शहद रिमूविंग मशीन, शहद इकट्ठा करने के लिए ड्रम, स्टैंड, छीलन छुरी, भोजन पात्र, हाईवे टूल (खुरपी), रानी रोक द्वार की आवश्यकता होती है।

मधुमक्खी पालन से सम्बंधित सामान खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करे।

मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) के लिए उपयुक्त समय

वैसे तो मधुमक्खी पालन वर्षभर किया जाता है लेकिन नवम्बर और दिसम्बर का समय, जब रबी की फसल, जिसमे भी सरसो की खेती होती है, को मधुमक्खी पालन के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस समय मधुमक्खी पालन से जबरदस्त फायदा होता है। मधुमक्खी पालन को यदि सरसो के खेत के पास किया जाए हो इससे डबल फायदा होता है एक तो शहद का उत्पादन, दूसरा सरसों का परागण हो जाता है जिससे सरसो की पैदावार भी बढ़ती है।

मधुमक्खियों (Madhumakkhi) के प्रकार

भारत में शहद के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों की चार महत्वपूर्ण प्रजातियां पायी जाती है। 

1. एपिस डोरसॅटा

इसे जायन्ट हनी बी (bee) भी कहा जाता है। यह दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में पायी जाती है। यह लगभग 17 मि॰मी॰ से 20 मि॰मी॰ लम्बी होती है। ये एक वर्ष में प्रति छत्ता 36 किलोग्राम तक शहद देती है। वैसे ये मधुमक्खियां आक्रामक होती हैं और इनका पालन नहीं किया जाता है।

2. एपिस फ्लोरिया

इसे ड्वार्फ बी (bee) भी कहा जाता है। यह दक्षिणी और दक्षिण पूर्व एशिया के छोटे, जंगली शहद मधुमक्खियों की दो प्रजातियों में से एक है। एपिस फ्लोरिया से शहद जंगल से लिया जात है क्योंकि ये घुमन्तु प्रजाति हैं और एक वर्ष में बहुत कम उपज लगभग 500 ग्राम ही देती हैं। इनका भी पालन नहीं किया जाता है।

3. एपिस सेराना इंडिका

यह भारतीय शहद मधुमक्खी, एशियाई शहद मधुमक्खी की एक उप-प्रजाति है। यह प्रमुख रूप से भारत, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड में पायी जाती है।  यह वर्ष भर में 6 किलोग्राम से 8 किलोग्राम तक शहद देती है।

4. एपिस मेलीफेरा

यह मधुमक्खी पालन में सबसे योग्य मानी जाती है। ये शांत स्वभाव होती हैं। इन्हें डिब्बों में आसानी से पाला जा सकता है। इस प्रजाति की रानी मक्खी में अंडे देने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है। यह एक वर्ष में 25 से 40 किलोग्राम तक शहद देती है।

Madhumakkhi Paalan (Beekeeping)

मधुमक्खी पालन (Madhumakkhi Paalan) के समय रखी जाने वाली सावधानी 

मधुमक्खी पालन के समय आस पास का स्थान साफ़ सुथरा होना चाहिए। मधुमक्खीयों को चींटी, मोहिपतंगा, छिपकली, गिरगिट, चूहे, बर्र, गोरैया चिड़िया, भालू आदि से बचाकर रखना चाहिए। ये सभी मधुमक्खियो को नुकसान पहुचा सकते है। समय समय पर बॉक्स को साफ़ करना चाहिए। ध्यान रखे बारिश के समय में मधुमक्खियों को अधिक देखभाल की जरुरत होती है। इसी के साथ मधुमक्खियों में होने वाली बिमारियों के बारे में पूर्ण जानकारी होनी आवश्यक है।

प्राप्त शहद को बेचने का स्थान

वैसे तो स्थानीय या प्रशासनिक स्तर पर शहद को बेचने व खरीदने के लिए कोई मंडी की व्यवस्था नहीं है लेकिन खुले बाजार जैसे अपने आस पास की स्थानीय दुकानों पर इन उत्पादों को बेच सकते है। इसके अलावा बहुत सी आयुर्वेदिक दवाई बनाने वाली कम्पनियां आपसे शहद लेकर अपना लेबल लगा कर उन्हें बाजार में बेच देती है। इसके अलावा आप स्वयं की दुकान खोल कर गांव या शहर में अपना शहद बेच सकते है।

Madhumakkhi Paalan (Beekeeping)

मुनाफा कितना होगा

एक बॉक्स आपको 3000 से 4000 रुपये में आसानी से मिल जाता है इनमे 8 से 10 फ्रेम होती है। एक बॉक्स से 10 से 15 दिनों में 2 किलो तक शहद प्राप्त हो जाता है। इस हिसाब से आप एक बॉक्स से एक महीने में 4 किलो तक शहद प्राप्त कर सकते है। यदि आप 30 बक्सों से अपना काम शुरू करते है तो एक माह में आप 120 किलो शहद प्राप्त कर सकते है।

इस शहद को बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच सकते है। जिससे 30 बॉक्सो से 18000 से 24000 रुपये प्रति माह आमदनी प्राप्त कर सकते है।

मधुमक्खी पालन में शहद के अलावा मोम, पोलन, मधुमक्खी डांक आदि अच्छी कीमत पर बेच सकते है।

 

ये जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट कर के अवश्य बताये।

 

ये भी पढ़े – HOW TO GET SELF CONFIDENCE || आत्मविश्वास कैसे प्राप्त करे 

3 thoughts on “मधुमक्खी पालन से कमाए लाखो रुपये || Earn handsome amount in Beekeeping

  1. I really wanted to make a brief word to express gratitude to you for the amazing tips and tricks you are writing at this site. My time consuming internet look up has finally been compensated with good quality details to write about with my friends. I would admit that many of us site visitors actually are rather lucky to be in a wonderful website with many perfect professionals with useful principles. I feel truly privileged to have seen your entire webpages and look forward to plenty of more brilliant minutes reading here. Thank you again for a lot of things. Donia Roddy Meghann

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *