Motivational Story in Hindi

Motivational Story in Hindi

प्रेरक कहानियों ( Motivational Stories) हमारे जीवन पर एक परिवर्तनकारी असर होता है। किसी व्यक्ति का संघर्ष और सफलता हमारे विचारो में क्रांति ला सकता है। हम यहाँ उन व्यक्तियों के संघर्ष और सफलता के ऐसी कहानियां (Motivational Stories in Hindi) प्रकाशित करते हैं जो हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सके। ये Motivational Story in hindi आपकी जिंदगी में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य लायेंगी ये हमारा वादा है।

रोशन की जंग || Roshan ki Jang

प्रारंभिक जीवन

दोस्तों, आज हम आपको एक सच्ची घटना से रूबरू करवाते हैं जो कि 8 साल के अबोध और मासूम बालक के साथ घटित हुई। जैसा के हम जानते है कि त्यौहार भारतीय संस्कृति का हमें एक अनमोल उपहार है और राजस्थान की धरा में त्यौहारो का आगमन एक अनूठा एहसास लेकर आता है। उसी में एक त्यौहार है जयपुर की मकर सक्रांति, इस दिन और इसके बाद भी कई दिनों तक, बच्चे और बड़े सभी मस्ती से पतंगों के महासंग्राम में एक योद्धा की भांति पतंगबाजी करते है।

जीवन की वो शाम

इसी महासंग्राम का एक योद्धा रोशन एक शाम अपनी छत पर पतंगों का युद्ध देख रहा था तभी एक रंग-बिरंगी पतंग को अपनी तरफ आता देख उसे पकड़ने के लिए एक लकड़ी उठायी लेकिन वो छोटी पड़ गयी तो उसने पास ही रखे लोहे के एक पाइप को उठा कर उससे पतंग को लेने का प्रयास किया, जैसे ही वह आगे बढ़ा तो पास से गुजरती हुई हाई टेंशन लाइन पर वो लोहे का पाइप गिर गया और उसमें अर्थिंग हो गई। रोशन झटका खा कर वही बेहोश होकर गिर गया। काफी देर तक जब रोशन घर में नहीं दिखा तो उसकी माँ उसे ढूंढती हुई छत पर आई तो वहां के दृश्य ने उनकी पैरो से जमीन खिसका दी। वे समझ नहीं पायी की क्या किया जाये फिर बड़ी मुश्किल से उन्होंने घरवालो को आवाज दी और वे उसे लेकर अस्पताल गए।

अस्पताल में संघर्ष

अस्पताल के डॉक्टरो ने रोशन की हालत को देखकर उसके बचने की उम्मीद कम ही नज़र आयी क्योंकि उसके दोनों हाथ और एक पैर बुरी तरह से झुलस गए थे लेकिन फिर भी उन्होंने अपना कर्त्तव्य निभाना शुरू किया। पहले तो उन्होंने कोशिश की कि हाथों और पैरों में ब्लड का सरकुलेशन शुरू हो जाए, लेकिन उन्हें जब इसका कोई पॉजिटिव रिजल्ट दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने रोशन के दोनों हाथ और एक पैर को काटने का सबसे बड़ा निर्णय उसके दादाजी पर छोड़ा।  दादाजी के अलावा घर में किसी को इस निर्णय का पता नहीं था। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि अगर इसे बचाने के लिए भगवान की यही मर्जी है तो यही ठीक है। रोशन को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था की उसके साथ क्या होने जा रहा था। खैर उसका ऑपरेशन शुरू हुआ और जब उसे होश आया उसने देखा कि उसके दोनों हाथ और एक पैर नहीं था।

अस्पताल के बाद का संघर्ष

लेकिन इसके बाद का असहनीय दर्द क्या होता है, जब व्यक्ति को मौत का आलिंगन करना उस दर्द को सहन करने से ज्यादा आसान लगे, और वो भी हर तीसरे दिन, वो इस 8 साल बालक को अच्छी तरह से मालूम है। जब उसके घावों पर ड्रेसिंग होती थी, इस बात का पता कॉलोनी में हर किसी को लग जाता था। वज़ह, उसकी मार्मिक चीख उस कॉलोनी के हर एक व्यक्ति को उसके दर्द की सूचना देती थी लेकिन लोहे के शरीर की भांति वो उस दर्द रूपी चोट को भी सहन कर गया।

डॉक्टर भी इस बच्चे का हौसला देखकर हैरान थे । समय के साथ साथ उसके शरीर और मन के घाव भरने लगे क्योंकि वो बालक समझ चुका था की यही उसकी जिंदगी है, और इसे रोकर या भला-बुरा कहकर नहीं जिया जा सकता, इसको संघर्ष के साथ जीना है।

मजबूत इरादा

समय बीतने के साथ – साथ रोशन सामान्य होने लगा लेकिन उसके दादाजी व अन्य सभी घर वालों को उसकी पढ़ाई की चिंता सताने लगी क्योंकि बिना पढाई के अपने सपनो को साकार कर पाना शायद थोड़ा मुश्किल होता है ये बात वे अच्छी तरह जानते थे। लेकिन शायद किस्मत उसके साथ और खेलना चाहती थी, और तोडना चाहती थी, लेकिन जिद का पक्का, मौत को चकमा देकर आया ये लड़का आसानी से हार मानने वाला नहीं था।

लेकिन ऐसा कोई स्कूल नहीं था जो उसकी पढ़ाई का जिम्मा ले सके। पास ही में खुले एक नये स्कूल ने रोशन के एडमिशन और पढाई का जिम्मा लिया। वहाँ वह पढ़ाई तो अन्य बच्चों की तरह करने लगा लेकिन हाथ नहीं होने की वजह से उसे लिखने में समस्या आती।

सामान्यतः लोग अपने जीवनकाल में एक बार लिखना सीखते हैं लेकिन रोशन ने तीन बार लिखना सीखा। पहली बार अपने हाथो से, दूसरी बार अपने कटे हुए हाथ पर पैन बांधकर, और तीसरी बार इलेक्ट्रॉनिक हाथ से। इसी तरह बच्चा एक बार चलना सीखता है लेकिन रोशन ने दो बार चलना सीखा। एक बार अपने पैरो से और दूसरी बार पैर कटने के बाद जयपुर फुट से। अब बारी थी रोशन की किस्मत के साथ खेलने की।

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Roshan, Trying to write

 

सामान्यतः स्कूल व कॉलेज की परीक्षा में हर फिजिकल हैंडीकैप पर्सन को परीक्षा में अतिरिक्त समय दिया जाता है लेकिन रोशन ने कभी अतिरिक्त समय नहीं लिया।  फिर उसने कुछ गवर्नमेंट एग्जाम्स की तैयारी करने का प्रयास किया, लेकिन वह 40 परसेंट से अधिक हैंडीकैप होने के कारण वह फॉर्म फिल नहीं कर पाता। फिर उसने अपने किसी दोस्त के साथ मिलकर एक इंस्टिट्यूट खोला लेकिन वहां भी सफलता नहीं मिली।

लेकिन, वह अपने संघर्ष को कविताओं के माध्यम से लिखने लगा और कवि सम्मेलनो में भाग लेने लगा। आज रोशन एक अच्छा कवि है। कई राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में मंच साझा कर चुका है। अपना काव्य संगृह “ख़्याल” का विमोचन कर चुका है। समय समय पर अपनी कविताओं के माध्यम से समाज को प्रेरित करने की कोशिश करता रहता है। “जयपुर रत्न” अवार्ड से नवाज़ा जा चुका है और एक मोटिवेशनल स्पीकर भी है।

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Roshan, Reciting Poetry

 

Motivational Story in Hindi
Roshan, Taking the Jaipur Ratan Award, 2019
Motivational Story in Hindi
Roshan, Releasing his anthology

वह स्वयं लोगों के लिए प्रेरणा है। जैसा कि हम जानते ही हैं कि इंसान अगर कुछ करना चाहे तो उसमें करने का जज्बा होना चाहिए फिर उसे कोई भी परिस्थिति हरा नहीं सकती।

रोशन का संघर्ष आज भी जारी है। आज भी वो उस योद्धा की भांति खड़ा है जिस दिन वो पतंगों के मैदान में खड़ा था ।

“लोग हाथों की लकीरों में अपनी तकदीर देखते हैं लेकिन जिनके हाथ नहीं होते तकदीर उनकी भी होती है। “

 

आपको रोशन का संघर्ष कैसा लगा हमें जरूर बताइये।

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