Surya Grahan (Solar Eclipse) 2020 सूर्य ग्रहण कल कब लगेगा, क्यों लगता है, कितने प्रकार का होता है, क्या सावधानी रखनी चाहिए, सारी जानकारियाँ यहाँ मिलेगी

रविवार 21 जून 2020 को  इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2020) होगा। यह सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2020) भारतीय समयानुसार सुबह 9:15 के आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में शुरू होगा और दोपहर 3:04 बजे तक रहेगा। इस सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2020) का मध्य काल 12:10 के आसपास रहेगा में जिसमें सूर्य एक वलय/फायर रिंग के रूप में नजर आएगा।

यह सूर्य ग्रहण भारत समेत विश्व के निम्न देशो में दिखाई देगा, जिसमें से चीन, अफ्रिका, कांगो, इथोपिया, नेपाल, पाकिस्तान आदि हैं।

Solar Eclipse
Solar Eclipse

सूर्य ग्रहण कब होता है ?

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी और सूरज के बीच में आता है, जो सूरज की कुछ या सभी किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकता है। ब्रह्मांडीय संयोग से, भले ही सूर्य चंद्रमा की तुलना में 400 गुणा विशाल है, लेकिन यह 400 गुणा दूर भी है। इसलिए, ये दोनों (सूर्य व चन्द्रमा) हमारे आकाश में एक ही आकार के दिखाई देते हैं। हमारे खगोलविद सूर्य या चंद्र ग्रहणों की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हैं क्योंकि पृथ्वी और चंद्रमा की बहुत ही अनुमानित कक्षाएँ हैं।

चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी के संबंध में आमतौर पर उत्तर या दक्षिण में कुछ डिग्री झुकी हुई है। जब चंद्रमा सूर्य को ग्रहण करता है, तो यह पृथ्वी पर दो प्रकार की छायाएं डालता है: एक छोटी व गहरी छाया, जिसे umbra के रूप में जाना जाता है, और एक बडी व  गहरी छाया, जिसे penumbra के रूप में जाना जाता है।

सूर्य ग्रहण कितने प्रकार का होता है  ?

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं।

  1. पूर्ण सूर्य ग्रहण

इनमे से पहला और सबसे शानदार ग्रहण, पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है, जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य की सतह को कवर करता है इस प्रकार सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं आ पाता एवं पृथ्वी पर अंधकार की स्थति हो जाती है । पूर्ण  ग्रहण केवल तभी देखा जा सकता है जब आप umbra छाया के भीतर खड़े हों।

  1. आंशिक सूर्य ग्रहण

इस प्रकार की स्थिति में चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य इस प्रकार आ जाता है कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है। लेकिन कुछ भाग पर सूर्य दिखाई देता है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि यहाँ सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है व पृथ्वी के उस भाग विशेष में लगा ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण कहलाता है।

  1. वलयाकार सूर्य ग्रहण

यह कुंडलाकार ग्रहण या वलयाकार ग्रहण कहलाता है,यह तब होता है जब चंद्रमा सीधे सूर्य के सामने से गुजरता है। हालांकि, पूर्ण ग्रहण के विपरीत, चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढंकने के लिए बहुत छोटा है। चंद्रमा की कक्षा अण्डाकार है, इसलिए कभी-कभी यह पृथ्वी के करीब होता है और कभी-कभी इससे दूर हो जाता है। सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है।

सूर्य ग्रहण को देखते समय निम्न सावधानियां रखे जाने के आवश्यकता है।

  1. सूर्य को सीधे देखते हुए, यहां तक कि एक ग्रहण के दौरान भी, आंखों की स्थायी क्षति हो सकती है।
  2. हमेशा सूर्यग्रहण को सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या eye clips Glasses से ही देखा जाना चाहिए। ये Solar Filter वाले Glasses कहलाते है।
  3. आपके नॉर्मल चश्मे या गॉगल्स आंखों को अल्ट्रा-वॉइलेट (UV) रेज़ से सुरक्षित नहीं रख सकते।
  4. अपनी आंखों को सूर्य ग्रहण के दौरान बचाये सूर्य के सीधे संपर्क में बिलकुल न आये खास तौर पर अपनी आँखों को बचाये ।
  5. सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य को पिनहोल, टेलेस्कोप, दूरबीन या किसे भी उपकरण से देखने का प्रयास न करे।

आपको ये जानकारी कैसी लगी, कृपया हमे कमेंट करके बताये।

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